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बच्चो में पढाई के प्रति एकाग्रता बढ़ाने “जादू मेरी सोच” का प्रोजेक्ट लॉन्च


भिलाई:- प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय के राजयोगा एजुकेशन एंड रिसर्च फाउंडेशन के शिक्षा प्रभाग द्वारा बच्चों के  उज्जवल भविष्य के लिए प्रारम्भ  एक अद्वितीय प्रोजेक्ट “जादू मेरी सोच का ” कार्यक्रम का प्रथम सेशन सेक्टर 7 स्थित पीस ऑडिटोरियम में क्लास 5 से क्लास 10 तक के बच्चों के लिए प्रारंभ हुआ |

 इस प्रोजेक्ट की समन्वयका तथा वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका  ब्रह्माकुमारी  प्राची दीदी  ने बच्चों को कहा कि एग्जाम से हम जीवन में आगे बढ़ते  हैं |

परिस्थितियां  सभी के जीवन में आती हैं|  आपने जादू मेरी सोच  का अर्थ बताते हुए कहा कि मैं नहीं कर पाऊंगा  यह नहीं सोचो  बल्कि मैं ही कर सकता हूं,  मेरे से अच्छा कोई भी नहीं कर सकता है यह है विचारों का जादू हमें इसी को अपने जीवन में अपनाना है| 

आपने  राजू और काजू दो दोस्तों की कहानी के माध्यम से बताया  की राजू हमेशा  इस  सोच के साथ कार्य करता था कि इसमें मुझे सफलता मिलनी ही है तथा काजू हर समय यह सोचता रहता था कैसे होगा ? क्या होगा ? कर पाऊंगा कि नहीं ? जिससे वह हर समय असफल होता था, तो हमें जीवन में  हमेशा सकारात्मक सोचने वाला बनना है मैं ही कर सकता यह दृढ़ संकल्प पक्का हो  |

आपने  खुशी का अर्थ बताते हुए कहा कि  हमारी मुस्कान खुशी दूसरों को भी  दुख और तनाव से राहत देती है , घर में खुशी का माहौल हो  जिससे  हम  याद किया हुआ  भूलेंगे नहीं ,  बच्चों ने  मेरी सोच का जादू विषय की  एक अलग से कॉपी  बनाई |

  सभी बच्चों को 5 मिनट की  मेडिटेशन कॉमेंट्री दी गई जिसे बच्चे  स्कूल जाने से पहले  तथा रात्रि सोने से पहले  पांच-पांच मिनट इसका अभ्यास करेंगे | आपने कहा कि मुझे किसी से भी तुलना  नहीं करना है, मैं 750 करोड़ लोगों में से अलग स्पेशल क्वालिटी  वाला बच्चा हूं  | सभी बच्चों को होमवर्क दिया गया  कि वह अपनी  10 क्वालिटी, विशेषताएं, गुण अगले हफ्ते तक लिखकर लानी है स्वयं के  चिंतन से  | मेरे जैसा कोई नहीं यदि दूसरा अच्छा है तो मुझे भी अच्छा बनना है लेकिन दूसरा  कमजोर है तो हमारी  अच्छाई से वह भी अच्छा बन जाए|  हमने अच्छा सोचा और उसे कर दिखाया उसकी कमाल होती है  सिर्फ अच्छा सोचने से नहीं  हम यहां सुनने नहीं आए हैं सुनकर सोचकर हमें उस जैसा बनना है| 

       इस कार्यक्रम में  मुख्य रूप से अमेरिका  के सैन फ्रांसिस्को से पधारी डॉक्टर कनिष्ठा ने बच्चों को  4 एक्सरसाईज के माध्यम से  बताया कि  पहला मैं लकी स्टार हूं   स्टार आसमान में चमकता है और हम धरती पर,  दूसरा  प्ले इन ओसियन  अर्थात  सागर की लहरों को अपने में समालु, तीसरा  माउंटेन स्ट्रांग  अर्थात पर्वत के समान अचला अडोल  चौथा ट्री   अर्थात सर्व  को छाया शीतलता देने वाला|   आपने कहा कि फेस इंडेक्स आवर माइंड , हमारे मन के विचारों से हमारा व्यक्तित्व चेहरे का निर्माण होता है|

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