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 सूक्ष्म आत्मा शरीर को कैसे चलाती हैं ? विज्ञान नहीं आध्यात्म के  पास है उत्तर

सूक्ष्म आत्मा शरीर को कैसे चलाती हैं ? विज्ञान नहीं आध्यात्म के  पास है उत्तर

विज्ञान कहता हैं कि मनुष्य का शरीर उसके दिमाग के द्वारा नियंत्रित होता हैं। मनुष्य के दिमाग से सूक्ष्म विद्युत तरंगें शरीर के हर अंग तक पहुंचती हैं। मनुष्य का दिमाग दिन में लगभग 100 व्हाट्स बिजली खर्च करता हैं। यह बिजली इतनी हैं जिससे एक छोटा बल्ब जल सकता हैं।

परंतु विज्ञान यह नही समझ पा रहा कि जो दिमाग सिर्फ एक मांस का गोला हैं उससे यह सूक्ष्म एनर्जी कैसे निकलती हैं। वास्तव में उस मस्तिष्क में बैठी हुई अति सूक्ष्म चैतन्य बिंदुरूप आत्मा द्वारा ये ऊर्जा निरंतर प्रवाहित होती रहती हैं। शरीर में फैली बाल से भी पतली नसों और धमनियों का जाल इतना विशाल बिछा हुआ होता हैं जिसे अगर एक सीधी लाईन में रखा जाए तो वो इतनी लंबी होगी जिससे पूरी पृथ्वी को कई बार घेरा लगा सकती हैं। इन बालों से भी बारीक नसों और धमनियों से निरंतर सूक्ष्म विद्युतीय तरंगें और खून बहता रहता हैं।

दिमाग के मध्य में बैठी अति सूक्ष्म बिंदुरूप चैतन्य आत्मा इन्ही सूक्ष्म तरंगों द्वारा ही शरीर के हर अंग से कार्य करवाती हैं। सेकंड के हजारवें हिस्से से भी कम समय में हर अंग तक सिग्नल पहुंच जाता हैं। जिसके माध्यम से ही मुख द्वारा बात की जाती हैं, आंखे प्रति मिली-सेकंड आसपास की इमेज  खींचकर दिमाग के बीच बैठी आत्मा तक भेजते रहते हैं। इसी से आवाज की सूक्ष्म तरंगों को भी आत्मा कैच करती हैं। इसी से ही आत्मा मुख द्वारा हसती हैं, बोलती हैं, हाथ, पैर हिलाती हैं। इसी तरंगों द्वारा आत्मा को स्वाद का, सुगंध का, दर्द का और स्पर्श इत्त्यादी का पता चलता हैं। यह सूक्ष्म एनर्जी निरंतर हमारी आंखे, हाथ, पैर और रोम रोम से आसपास के  वायुमंडल में प्रवाहित होती रहती हैं।

 हम आत्माओं का सूक्ष्म आकारी प्रकाशमय  विद्युतीय शरीर यह हमारे हड्डी मांस के शरीर की हर एक यानी अरबों, खरबों पेशियों से कनेक्टेड होता हैं। जिसके ही कारण किसीका हल्का सा स्पर्श भी हमें तुरंत पता चल जाता हैं।

 पांच तत्वों में फैली चुम्बकीय शक्ति के साथ भी हम आत्माए कनेक्टेड होती हैं। हम जैसे कर्म करते हैं। जैसे संकल्प करते हैं उस संकल्पों से निकलती पॉजिटिव या निगेटिव ऊर्जा अनुसार प्रकृति हम तक सुख अथवा दुख की परिस्थितिया या अच्छा स्वास्थ / रोग बीमारी भेजती रहती हैं। आत्मा में जैसी भी अच्छी या बुरी एनर्जी भरी हुई होती हैं उसी प्रकार से उसके स्थूल शरीर के अंगों का भी विकास होता हैं।

 हम आत्माओं के अंदर भी Inbuilt ही एक हाय  क्वालिटी कॅमेरा, कैलक्यूलेटर, दिशादर्शक यंत्र (कंपास),  मोबाईल, टॉर्च, मेसेंजर, एंटी-वायरस, ऑडियो,  वीडियो, इमेज रेकॉर्डर, अनलिमिटेड GB का मेमोरी कार्ड* इत्त्यादी होता हैं।

 जिस सूक्ष्म एनर्जी के जरिये इतनी सूक्ष्म आत्मा इतने बडे, भारी शरीर से कार्य करवाती हैं उसी सूक्ष्म तरंगों द्वारा आत्मा धरती से इतनी दूर परमधाम में बैठे बिंदुरूप चैतन्य शिव पिता के साथ भी कनेक्ट हो जाती हैं और स्वयं की डिस्चार्ज बॅटरी को चार्ज करत हैं साथ ही साथ परमात्म पिता द्वारा भरी इस एनर्जी को सर्वत्र प्रवाहित कर संसार की अन्य आत्माओं को भी रिचार्ज करते हैं।

“तन एवम् मन के रक्षक –डॉक्टर्स” विषय पर ऑनलाइन

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