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शिव तत्व की उपासना से सामाजिक सद्भावना प्रो.बलदेव शर्मा कुलपति

शिव तत्व की उपासना से होगी सामाजिक सद्भावना… प्रो. बलदेव भाई शर्मा, कुलपति
रायपुर, 7 मार्च: कुशाभाउ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बलदेव भाई शर्मा ने कहा कि शिव का स्वरूप कल्याणकारी है। शिव की अराधना करने का मतलब सिर्फ अक्, धतूरा चढ़ाना मात्र नहीं है, वरन् जगत के कल्याण के लिए जीना होगा। अपने उन्नयन और जगत के कल्याण के लिए जीना ही शिव तत्व है। इस शिव तत्व को अन्तर्मन में समाहित करने की जरूरत है।
प्रो. बलदेव भाई शर्मा आज प्रजापिता बह्माकुमारी ईश्वरीय विश्व विद्यालय द्वारा नवा रायपुर के शान्ति शिखर भवन में आयोजित महाशिवरात्रि महोत्सव कार्यक्रम में बोल रहे थे। विषय था -परमात्मा शिव का दिव्य अवतरण कब, क्यों और कैसे?
उन्होंने आगे कहा कि आजकल इस तरह का जीवन हो गया है कि सब कुछ प्राप्त करने की चाह में हम दौड़ते रहते हैं। यह दौड़ ज्यादा से ज्यादा सुख प्राप्त करने के लिए होता है किन्तु अन्त में जब निरीक्षण करते हैं तो पता चलता है कि हमें कुछ भी हासिल नहीं हुआ है। दरअसल आत्मा में आनन्द समाया हुआ है। उसको पहचानने की जरूरत है। ज्ञान को जब तक आचरण में नहीं लाएंगे तब तक वह व्यर्थ है।
गृह सचिव अरूण देव गौतम ने रामचरित मानस के श्लोकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उसमें शिव की को श्रद्घा और विश्वास के रूप में माना गया है। अन्त:करण में श्रद्घा के रूप में दर्शन हो सकता है। उन्होंने कहा कि हम अपने स्वरूप को भूल गए हैं। अपने को पंचभूत देह मान बैठे हैं। अपने सही स्वरूप की पहचानने दिलाने का कार्य ब्रह्माकुमारी बहनें कर रही हैं। इसी से सारे दु:खों और कष्टों का अन्त होगा।
भारतीय प्रबन्धन संस्थान (आई.आई.एम.) ने कहा कि अपने अन्दर की ज्योति को प्रकाशित करना ही सच्ची शिवरात्रि है। अवश्यकता है कि हम अपने आपको जानें। उन्होंने महाभारत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि हम सद्गुणों को तो आचरण में लाएं किन्तु साथ ही दुर्गुणों को बर्दास्त न करें।
ब्रह्माकुमारी संस्थान की क्षेत्रीय निदेशिका कमला दीदी ने कहा कि हमारा देश त्यौहारों का देश है। लेकिन जब तक उन त्यौहारों का यथार्थ अर्थ न समझें उसका पूरा लाभ नहीं उठा सकते। अभी समाज में बहुत बदलाव आ चुका है। पहले लोग कहते थे कि हम रिश्वत नहीं लेंगे क्योंकि हम बाल बच्चे वाले आदमी हैं। किन्तु आज कहते हैं कि हम रिश्वत नहीं लेंगे तो कैसे चलेगा क्योंकि हम बाल बच्चे वाले जो हैं। वर्तमान समय लोगों का अपनी कर्मेन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं रहा। यह अतिधर्म ग्लानि का समय है।
राजयोग शिक्षिका ब्रह्माकुमारी नीलम बहन ने कहा कि यही समय है जबकि परमात्मा इस धरा पर आकर आध्यात्मिक ज्ञान और राजयोग की शिक्षा देकर नई दुनिया की पुर्नस्थापना का कार्य करते हैं। राजयोग के सतत् अभ्यास से मन की वृत्तियॉं शुद्घ होती हैं तथा सभी को आत्मिक रूप में समान दृष्टिï से देखने के परिणामस्वरूप समाज में सद्भावना की स्थापना होती है।

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